कांग्रेस की ज़बरदस्त जीत
क्या हुआ
उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में एक ही पार्टी को आराम से बहुमत मिला।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 425 में से 269 सीटें जीतीं; किसी भी पैमाने पर यह एकतरफ़ा जीत थी।
इससे उसके पास सामान्य बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 56 सीटें ज़्यादा थीं।
लोक दल 84 सीटों के साथ काफ़ी पीछे दूसरे स्थान पर रही।
क्या बदला
इस बार राज्य के मुख्य विपक्ष ने उत्तर प्रदेश में इतनी सीटें पहले कभी नहीं जीती थीं।
लोक दल 84 सीटों के साथ विधान सभा में पहुँची और सीधे सदन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई।
इस चुनाव में 1 सीट पर निर्विरोध चुनाव भी हुआ — यानी वहाँ सिर्फ़ एक उम्मीदवार खड़ा था, इसलिए फ़ैसले के लिए मतदान की ज़रूरत नहीं पड़ी।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
इस चुनाव का सबसे क़रीबी परिणाम छिबरामऊ, उत्तर प्रदेश में आया, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 36 वोट रहा।
इस चुनाव का सबसे एकतरफ़ा परिणाम अमेठी, उत्तर प्रदेश में आया, जहाँ विजेता 97.0% वोटों से आगे रहा, और इसी निर्वाचन क्षेत्र में इस चुनाव का सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भी दर्ज हुआ, 78.5%।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से गोविंद नगर, उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जिसकी मतदाता सूची में 2,13,858 मतदाता थे।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार इलाहाबाद उत्तर, उत्तर प्रदेश में उतरे, बैलट पर 35 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
इमरजेंसी के बाद के बरसों में उत्तर प्रदेश में कई अलग-अलग पार्टियाँ बारी-बारी से सत्ता में आ चुकी थीं।