दूसरी जीत, पर पहले से छोटी
क्या हुआ
उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी फिर जीती, लेकिन इस बार की एकतरफ़ा जीत पहली से छोटी थी।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 286 सीटें जीतीं; इस तरह वह लगातार 2 चुनाव जीत चुकी थी।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 42.4% रहा।
निर्दलीय का गुट 74 सीटों के साथ सबसे बड़ा विपक्ष था।
क्या बदला
इस चुनाव में 1951 के बाद पहली बार सीटों का नक्शा नए सिरे से बनाया गया।
इसमें 430 सीटें भरने के लिए 341 निर्वाचन क्षेत्र थे।
उनमें से 89 निर्वाचन क्षेत्रों ने पहले की तरह दो-दो सदस्य चुने।
तब से (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) में भी +7.4 प्रतिशत अंक का बदलाव आया।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: औरैया, उत्तर प्रदेश का फ़ैसला सिर्फ़ 69 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
उस साल किसी भी सीट से ज़्यादा मतदान प्रतिशत कैराना, उत्तर प्रदेश में दर्ज हुआ, 88.1%।
4 सीटों पर निर्विरोध चुनाव हुआ — यानी वहाँ सिर्फ़ एक उम्मीदवार खड़ा था, इसलिए फ़ैसले के लिए मतदान की ज़रूरत नहीं पड़ी।
दूसरी ओर, किसी भी सीट पर सबसे बड़ा जीत का अंतर उझानी, उत्तर प्रदेश में रहा, 61.3% वोट।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव में पहली बार नए दल उत्तर प्रदेश की विधान सभा में पहुँचे।
प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और भाकपा ने पहली बार एक-एक सीट जीती।