त्रिशंकु सदन
क्या हुआ
इस चुनाव में उत्तर प्रदेश में (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा बनी।
सबसे ज़्यादा सीटें भारतीय जनता पार्टी ने जीतीं, कुल 422 में से 177।
इससे वह 212 सीटों के बहुमत के आँकड़े से पीछे रह गई।
समाजवादी पार्टी 109 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
क्या बदला
इस चुनाव में सबसे साफ़ हलचल यह थी कि निवर्तमान विधान सभा में सबसे आगे रही पार्टी से सीटें दूर खिसक गईं।
पिछली बार भाजपा के खाते में गए 48 निर्वाचन क्षेत्र इस बार सपा के पास गए, जो राज्य का सबसे बड़ा बदलाव था।
भाजपा अब लगातार 2 चुनावों में उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी रही है।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।
इस चुनाव का सबसे क़रीबी परिणाम फरेन्दा, उत्तर प्रदेश में आया, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 50 वोट रहा।
इस चुनाव में सबसे बड़ा जीत का अंतर कुण्डा, उत्तर प्रदेश में रहा, जहाँ विजेता 52.3% वोटों से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) ठाकुरद्वारा, उत्तर प्रदेश में रहा, 73.4%।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से गोविंद नगर, उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जिसकी मतदाता सूची में 3,63,340 मतदाता थे।
पृष्ठभूमि
दो सबसे बड़े दलों के अलावा विधान सभा में कई छोटे दल भी पहुँचे।
10 दलों ने कम से कम एक सीट जीती, और निर्दलीयों ने 8 सीटें और जीतीं।
इस चुनाव में दूसरे स्थान पर रही पार्टी कुछ ही समय पहले एक मौजूदा पार्टी से टूटकर बनी थी।