कर्णप्रयागविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1993
रमेश पोखरियाल निशंक (BJP) ने 1993 के विधान सभा चुनाव में 41.2% वोट पाकर कर्णप्रयाग सीट जीती और शिवा नन्द नौटियाल (INC) को 230 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 6 पौड़ी थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 6 बिजनौर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
कर्णप्रयाग का फ़ैसला सिर्फ़ 0.3% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 230 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रमेश पोखरियाल निशंक | 32,67741.2% | |
| 2 | शिवा नन्द नौटियाल | 32,44740.9% | |
| 3 | भारत सिंह चौधरी जनता दल | जनता दल | 5,4746.9% |
| 4 | हरीश पुजारी समाजवादी पार्टी | समाजवादी पार्टी | 2,2212.8% |
| 5 | सिद्ध लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 2,0292.6% |
| 6 | नव कुमार UKD | UKD | 1,6452.1% |
| 7 | डी. एन. नौटियाल JP | JP | 1,2701.6% |
| 8 | जीत राम निर्दलीय | निर्दलीय | 7240.9% |
| 9 | बसंत सिंह BMKD | BMKD | 3440.4% |
| 10 | वाचस्पति जोशी निर्दलीय | निर्दलीय | 2670.3% |
| 11 | उमेद सिंह रावत गणपति निर्दलीय | निर्दलीय | 2030.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP, INC और JD को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.90 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कर्णप्रयाग से कौन जीता, 1974–1996
BJP ने 1991 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 42.6% से घटकर 41.2% रह गया। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1991 के 45.1% से बढ़कर 52.0% हो गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1974शिवा नन्द नौटियाल (INC), जीत का अंतर 48.1%
- 1977शिवानंद नौटियाल (JNP), जीत का अंतर 48.2%
- 1980शिवा नन्द नौटियाल (IND), जीत का अंतर 56.7%
- 1985शिवा नन्द नौटियाल (LKD), जीत का अंतर 9.0%
- 1989शिवानंद (INC), जीत का अंतर 7.5%
- 1991रमेश पोखरियाल निशंक (BJP), जीत का अंतर 5.4%
- 1993रमेश पोखरियाल निशंक (BJP), जीत का अंतर 0.3%
- 1996रमेश पोखरियाल निशंक (BJP), जीत का अंतर 12.8%