परिसीमन विधेयक 2026 सीट सिम्युलेटर

लोक सभा सीटों का कैलकुलेटर: अगर ऐसा हो तो क्या होगा, राज्य-अनुसार।

  • विधेयक गिरा 17 अप्रैल 2026, 298–230
  • जनगणना देश के ज़्यादातर हिस्से में संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027
  • अभी तक कोई आयोग गठित नहीं
  • आख़िरी जाँच: 14 अक्टूबर 2026

बदलाव के हिसाब से भारत

किसी राज्य पर टैप करें।

तमिलनाडु: 39 से 59 सीटें, 20 सीटें ज़्यादा

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2026 का विधेयक: एक नज़र में

सदन का आकार
815
आज की 543 से +272
महिलाओं की सीटें
272
सदन का एक-तिहाई। कौन-सी सीटें?
दक्षिण के पाँच राज्य
195 815 में से
सदन का 23.9%, आज 23.8%
तमिलनाडु, केरलम, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
सबसे बड़ा बदलाव
उत्तर प्रदेश
40 सीटें ज़्यादा: 80 से 120

अगर 2024 के वोट इन सीटों पर गिने जाएँ

गिनती हो रही है…

आपका राज्य

तमिलनाडु
39
आज
59
2026 का विधेयक
20 सीटें ज़्यादा
हर सीट पर लोग, 2026 का अनुमान
19.9 लाख → 13.1 लाख
हर सीट पर पंजीकृत मतदाता, 2024 की सूची
16.0 लाख → 10.6 लाख

सदन में हिस्सा: आज 7.18%, इस परिदृश्य में 7.24%।

नए सिरे से बना राज्य

हर राज्य

2026 का विधेयक, राज्यों के नाम के क्रम में। यह कोई रैंकिंग नहीं है।

राज्य-अनुसार लोक सभा सीटें: आज और परिदृश्य “2026 का विधेयक” में, बदलाव, और सदन में हिस्सा
राज्यआजसीटेंबदलावसदन में हिस्सा
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह11कोई बदलाव नहीं0.12%
अरुणाचल प्रदेश231 ज़्यादा0.37%
असम14217 ज़्यादा2.58%
आंध्र प्रदेश253813 ज़्यादा4.66%
उत्तर प्रदेश8012040 ज़्यादा14.72%
उत्तराखंड572 ज़्यादा0.86%
ओडिशा213211 ज़्यादा3.93%
कर्नाटक284214 ज़्यादा5.15%
केरलम203010 ज़्यादा3.68%
गुजरात263913 ज़्यादा4.79%
गोवा231 ज़्यादा0.37%
चंडीगढ़121 ज़्यादा0.25%
छत्तीसगढ़11165 ज़्यादा1.96%
जम्मू और कश्मीर583 ज़्यादा0.98%
झारखंड14217 ज़्यादा2.58%
तमिलनाडु395920 ज़्यादा7.24%
तेलंगाना17269 ज़्यादा3.19%
त्रिपुरा231 ज़्यादा0.37%
दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव231 ज़्यादा0.37%
दिल्ली7114 ज़्यादा1.35%
नागालैंड11कोई बदलाव नहीं0.12%
पंजाब13196 ज़्यादा2.33%
पश्चिम बंगाल426321 ज़्यादा7.73%
पुडुचेरी121 ज़्यादा0.25%
बिहार406020 ज़्यादा7.36%
मणिपुर231 ज़्यादा0.37%
मध्य प्रदेश294415 ज़्यादा5.40%
महाराष्ट्र487224 ज़्यादा8.83%
मिजोरम11कोई बदलाव नहीं0.12%
मेघालय231 ज़्यादा0.37%
राजस्थान253813 ज़्यादा4.66%
लक्ष्द्वीप11कोई बदलाव नहीं0.12%
लद्दाख11कोई बदलाव नहीं0.12%
सिक्किम11कोई बदलाव नहीं0.12%
हरियाणा10155 ज़्यादा1.84%
हिमाचल प्रदेश462 ज़्यादा0.74%
भारत543815272 ज़्यादा100%

अगर 2024 के वोट इन सीटों पर गिने जाएँ: NDA 439 · INDIA 342 · अन्य 32

अगर 2019 के वोट इन सीटों पर गिने जाएँ: NDA 511 · UPA 141 · अन्य 161

यह कैसे काम करता है

यह क्या नहीं है

इस पेज की हर बात आज के आँकड़ों पर बना एक सिम्युलेशन है। यह इसकी भविष्यवाणी नहीं है कि संसद क्या तय करेगी, न यह आयोग का काम है, और न किसी पार्टी के लिए अनुमान।

परिसीमन क्या है, और अभी कहाँ तक पहुँचा है

यह पेज एक सीट कैलकुलेटर है: यह सदन की सीटें राज्यों में बाँटता है, हर राज्य की सीटें विधान सभा के नक्शे पर नए सिरे से बनाता है और उन पर 2024 के वोट गिनता है। परिसीमन में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ इस तरह खींची जाती हैं कि हर सीट में लगभग बराबर लोग हों, और तय होता है कि हर राज्य की कितनी सीटें होंगी। यह काम परिसीमन आयोग संसद के पास किए क़ानून के तहत करता है। राज्यों की सीटों की संख्या 1976 से 1971 के अपने हिस्सों पर टिकी है।

17 अप्रैल 2026 को लोक सभा में संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक गिर गया: पक्ष में 298, विरोध में 230 वोट, जबकि 352 चाहिए थे। यह विधेयक सदन को राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सीटों तक सीमित करता, और इसमें राज्य-अनुसार सीटों की कोई तालिका नहीं थी: “हर राज्य के लिए +50%” का आँकड़ा संसद में सरकार का प्रस्ताव था, विधेयक का पाठ नहीं। कोई आयोग मौजूद नहीं है। जनगणना 2027 के लिए देश के ज़्यादातर हिस्से में संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 है।

पाँच परिदृश्य

  • आज (543)। सीटें जैसी आज हैं।
  • 2026 का विधेयक (+50%, 815)। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सीटों को 1.5 से गुणा किया जाता है। जहाँ इससे आधी सीट बचती है, वहाँ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग, सबसे बड़े शेष की विधि से तय होता है: राज्यों के लिए 786 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 29, विधेयक की सीमाओं के भीतर।
  • जनसंख्या के हिसाब से 543, मौजूदा क़ानून के मुताबिक़। जनगणना 2027 प्रकाशित होने पर सीटों पर संवैधानिक रोक ख़त्म हो जाती है और सीटें जनसंख्या के हिसाब से बँटती हैं। यहाँ मौजूदा 543 सीटें 1 मार्च 2026 के लिए रजिस्ट्रार जनरल के अनुमान से, सबसे बड़े शेष की विधि से, हर राज्य को कम से कम एक सीट देकर बाँटी गई हैं। साठ लाख से कम लोगों वाले राज्य और सभी केंद्र शासित प्रदेश आज की सीटें रखते हैं, जैसा अनुच्छेद 81 में है।
  • किसी राज्य की सीटें कम न हों (767)। यह सरकार का प्रस्ताव नहीं है: जनसंख्या के हिसाब से बँटा सबसे छोटा सदन, जिसमें किसी भी राज्य की सीटें आज से कम न हों। एक सीट और कम होने पर केरलम आज की संख्या से नीचे चला जाएगा। कार्नेगी एंडोमेंट (2019, 2026) और IIPS (पटेल और शेखर, 2024) भी यही विचार इस्तेमाल करते हैं।
  • पूरी क्षमता का सदन (888)। नए लोक सभा सदन का आकार, सीटें इसी तरह जनसंख्या के हिसाब से बाँटी गईं।

सदन-आकार का डायल 543 से 950 तक किसी भी आकार के लिए यही करता है।

सीमाएँ कैसे खींची जाती हैं

राज्य के भीतर, आज की विधान सभा सीटों को जोड़कर नई लोक सभा सीटें बनाई जाती हैं, 2002–08 में इस्तेमाल हुई विधि के एक सरल रूप से। पहले हर ज़िले को राज्य की सीटों में एक हिस्सा दिया जाता है (जिस ज़िले का हिस्सा पूरी संख्या से दूर होता है, उसे पड़ोसी ज़िले से जोड़ा जाता है)। फिर सीटों को पड़ोस की विधान सभा सीटों पर बढ़ाया जाता है, जहाँ हो सके उसी ज़िले को तरजीह देते हुए, जब तक हर सीट में लगभग बराबर मतदाता न हो जाएँ, और आख़िरी दौर में पड़ोसी सीटों के बीच सीमा की सीटों की अदला-बदली होती है। ये सीमाएँ एक सिम्युलेशन हैं, कोई प्रस्ताव नहीं।

आयोग का लक्ष्य था कि हर सीट राज्य के औसत से ±10% के भीतर रहे। यह दायरा एक लक्ष्य है, वादा नहीं: दोबारा बनाई गई लगभग एक-चौथाई सीटें (विधान सभा का नक्शा रखने वाले 31 राज्यों में, चारों दोबारा बनाए गए परिदृश्यों को मिलाकर 2,987 में से 771) लक्ष्य से 10 प्रतिशत से ज़्यादा दूर रह जाती हैं और 24 सीटें 50 प्रतिशत से ज़्यादा दूर; पेज हर सीट का असली आँकड़ा दिखाता है। शहरों की सीमाएँ मोटे तौर पर खींची गई हैं, क्योंकि एक विधान सभा सीट पूरी नई शहरी सीट से बड़ी हो सकती है। हर नई सीट एक जुड़ा हुआ टुकड़ा हो, यह ज़रूरी नहीं।

SC और ST सीटें

हर राज्य के पास आज जितनी SC और ST सीटें हैं, उन्हें नई सीटों की संख्या के हिसाब से सबसे बड़े शेष की विधि से घटाया-बढ़ाया जाता है। कौन-सी नई सीटें आरक्षित हों, यह एक अनुमान (प्रॉक्सी) है, आयोग का नियम नहीं (आयोग जनगणना के हिस्सों का इस्तेमाल करेगा): सीटों को इस आधार पर क्रम में रखा जाता है कि उनके कितने मतदाता आज की SC-आरक्षित (फिर ST-आरक्षित) विधान सभा सीटों में रहते हैं, और जहाँ विकल्प हो वहाँ पहले चुनी जा चुकी सीट के बगल वाली सीट छोड़ दी जाती है। पाँच पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विधेयक की न्यूनतम ST सीटों को शामिल नहीं किया गया है।

महिलाओं की सीटें: एक यादृच्छिक ड्रॉ

106वाँ संशोधन परिसीमन पूरा होने के बाद, निर्वाचन क्षेत्रों के बीच बारी-बारी से, “जहाँ तक हो सके” एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करेगा। संसद ने बारी-बारी की यह व्यवस्था अभी नहीं लिखी है, इसलिए कोई नहीं जानता कि कौन-सी सीटें होंगी। इसलिए यह पेज किसी राज्य की सीटों का एक-तिहाई हिस्सा, ऊपर की ओर गोल करके, संयोग से निकालता है। यह सीड वाला समान-संभावना का ड्रॉ है: हर सीट के चुने जाने की संभावना बराबर है, क्षेत्रों में फैलाने का कोई नियम नहीं है, न कोई भार, और SC या ST के लिए आरक्षित सीटें भी बाक़ी सीटों की तरह इसमें शामिल होती हैं। सीड लिंक में चलता है, इसलिए एक ही राज्य, परिदृश्य और सीटों की संख्या के लिए वही लिंक वही सेट दिखाता है। पूरे भारत का नक्शा जितनी सीटें दिखाता है उनका एक-तिहाई उसी सीड से, राज्य के ड्रॉ से अलग एक ड्रॉ में निकालता है, इसलिए दोनों का मेल खाना ज़रूरी नहीं।

दोबारा गिनती

“अगर 2024 के वोट इन सीटों पर गिने जाएँ” में हर नई सीट के लिए, उसकी विधान सभा सीटों में पड़े वोट जोड़े जाते हैं, भारत निर्वाचन आयोग के विधान सभा-खंड वार परिणामों से, जैसा OpenCity ने दोबारा प्रकाशित किया है। जिस पार्टी को सबसे ज़्यादा वोट मिलते हैं, सीट उसके नाम गिनी जाती है, और सीट उस पार्टी के गठबंधन में गिनी जाती है: वह गठबंधन जो उस साल की लोक सभा परिणाम तालिका उसके सीट पाने वालों को देती है (2024 में NDA और INDIA, 2019 में NDA और UPA)। जिस दल को उस साल कोई सीट नहीं मिली, और हर निर्दलीय, “अन्य” में गिना जाता है, भले वह किसी का सहयोगी रहा हो। किसी सीट पर निर्दलीय एक समूह में गिने जाते हैं। सहयोगी दलों के वोट आपस में जोड़े नहीं जाते: जहाँ सहयोगी किसी नई सीट के अलग-अलग हिस्सों में खड़े थे, वहाँ उनके वोट उनके बीच बँटे रहते हैं, इसलिए यहाँ किसी गठबंधन का कुल आँकड़ा उस गिनती से अलग हो सकता है जिसमें उसके सहयोगियों के वोट जोड़े गए हों। सिर्फ़ EVM के वोट गिने जाते हैं: डाक मतपत्र पूरी पुरानी सीट के लिए गिने जाते हैं, विधान सभा सीट-अनुसार नहीं, इसलिए वे शामिल नहीं हैं।

सुरत में 2024 में उम्मीदवार निर्विरोध चुना गया था, इसलिए वहाँ कोई वोट नहीं पड़ा और सिर्फ़ उसकी विधान सभा सीटों से बनी नई सीट घोषित उम्मीदवार के गठबंधन में गिनी जाती है। असम और जम्मू और कश्मीर में 2019 में उन विधान सभा सीटों पर मतदान हुआ था जिनकी सीमाएँ बाद में बदल गईं, इसलिए उनके 2019 के आँकड़े अनुमानित हैं: हर पुरानी सीट के वोट नक्शों के ओवरलैप के हिसाब से आज की सीटों में फैलाए गए हैं, और हर पार्टी का कुल वही रखा गया है, हालाँकि कोई एक सीट मोटा अंदाज़ा है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, लद्दाख और लक्ष्द्वीप का विधान सभा सीटों का नक्शा नहीं है और उन्हें उनकी असली सीटों पर गिना जाता है, इसलिए विधेयक के तहत तीनों समूहों का जोड़ विधेयक की 815 सीटों में से 813 होता है।

आँकड़े किस साल के हैं

राज्य-अनुसार सीटें: 1 मार्च 2026 के लिए रजिस्ट्रार जनरल का अनुमान। ज़िलों की सीमाएँ: जनगणना 2011। मतदाता: हर राज्य की सबसे ताज़ा विधान सभा सूची, और विधान सभा के नक्शे के बिना वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 2024 की सूची। वोट: 2024 और 2019 के लोक सभा परिणाम।

स्रोत और लाइसेंस

  • राज्य-अनुसार सीटें: RGI / NCP तकनीकी समूह, Population Projections for India and States 2011–2036 (जुलाई 2020), तालिका 21।
  • राज्य-अनुसार मतदाता: भारत निर्वाचन आयोग, ECI Atlas 2024, Annexure III।
  • ज़िले और जनसंख्या: भारत की जनगणना 2011, भारत सरकार के ओपन डेटा लाइसेंस (GODL) के तहत।
  • विधान सभा सीट-अनुसार 2024 के वोट: भारत निर्वाचन आयोग, OpenCity द्वारा दोबारा प्रकाशित। लाइसेंस: पब्लिक डोमेन।
  • विधान सभा सीट-अनुसार 2019 के वोट: पब्लिक डोमेन (ECI के परिणाम, OpenCity द्वारा दोबारा प्रकाशित)।
  • विधेयक और जनगणना की समय-सारणी: PRS Legislative Research; प्रेस सूचना ब्यूरो।
  • सीमाएँ: आज की विधान सभा सीटों के नक्शे; श्रेय और लाइसेंस प्रोजेक्ट के बारे में पेज पर हैं।