त्रिशंकु विधान सभा
क्या हुआ
उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी फिर सबसे ज़्यादा सीटों के साथ आगे रही, लेकिन इस बार अकेले सरकार चलाने लायक़ सीटें उसके पास नहीं थीं।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 425 सीटों में से 199 सीटें जीतीं।
इससे विधान सभा (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) रह गई।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 32.2% रहा।
क्या बदला
यह चुनाव सीमाओं के एक संशोधन के बाद हुआ, जिससे विधान सभा का आकार छोटा हो गया।
विधान सभा में अब 425 सीटें थीं, जो पिछले चुनाव में 430 थीं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) में भी पिछले चुनाव के मुक़ाबले +2.3 प्रतिशत अंक का बदलाव हुआ।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: दिलदारनगर, उत्तर प्रदेश का फ़ैसला सिर्फ़ 1 वोट से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, किसी भी सीट पर सबसे बड़ा जीत का अंतर छपरौली, उत्तर प्रदेश में रहा, 75.3% वोट।
उस साल किसी भी सीट से ज़्यादा मतदान प्रतिशत रामपुर, उत्तर प्रदेश में दर्ज हुआ, 72.0%।
उस साल किसी भी सीट से ज़्यादा उम्मीदवार अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में उतरे, कुल 21।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव में भी नए दल उत्तर प्रदेश की विधान सभा में पहुँचे।
संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ने पहली बार एक-एक सीट जीती।