भाटपार रानीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1967
ए. प्रसाद आर्य (INC) ने 1967 के विधान सभा चुनाव में 27.5% वोट पाकर भाटपार रानी सीट जीती और हरबंस (SSP) को 2,404 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 209 पडरौना पूर्व थी। 1969 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1974 से सीट नंबर 209 सगड़ी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। ए. प्रसाद आर्य 4.8% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | ए. प्रसाद आर्य | 13,73327.5% | |
| 2 | हरबंस | 11,32922.7% | |
| 3 | त्रिगुणानंद निर्दलीय | निर्दलीय | 10,10020.2% |
| 4 | आर. रतन निर्दलीय | निर्दलीय | 6,85813.7% |
| 5 | आर. नाथ Bharatiya Jana Sangh | Bharatiya Jana Sangh | 4,2728.6% |
| 6 | आर. शास्त्री निर्दलीय | निर्दलीय | 2,5465.1% |
| 7 | नथुनी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1072.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 70% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.07 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
भाटपार रानी से कौन जीता, 1967–1969
इसके बाद 1969 के चुनाव में यह सीट SSP ने जीती।
- 1967ए. प्रसाद आर्य (INC), जीत का अंतर 4.8%
- 1969हरिबंश (SSP), जीत का अंतर 6.2%