उत्तर प्रदेश की पहली विधान सभा
क्या हुआ
उत्तर प्रदेश की अपनी विधान सभा के पहले चुनाव में एक पार्टी की एकतरफ़ा जीत हुई।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 430 सीटों में से 390 सीटें जीतीं।
यह विधान सभा की 90.7% सीटें थीं — बहुमत के 216 सीटों के आँकड़े से काफ़ी ज़्यादा।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) अपेक्षाकृत मामूली, 47.9%, था।
क्या बदला
यह उत्तर प्रदेश की अपनी विधान सभा का पहला चुनाव था, जो राज्य की शुरुआती सीमाओं पर हुआ।
इसमें 430 सीटें भरने के लिए 347 निर्वाचन क्षेत्र थे।
उनमें से कुछ निर्वाचन क्षेत्रों ने एक से ज़्यादा सदस्य चुने; उस साल यह बहु-सदस्यीय व्यवस्था लागू थी।
83 सीटें इसी तरह की थीं।
औसतन हर सीट पर 7.5 उम्मीदवार मैदान में थे।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: बीकापुर पूर्व, उत्तर प्रदेश का फ़ैसला सिर्फ़ 1 वोट से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, किसी भी सीट पर सबसे बड़ा जीत का अंतर डुमरियागंज दक्षिण, उत्तर प्रदेश में रहा, 68.8% वोट।
उस साल किसी भी सीट से ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) कैराना दक्षिण, उत्तर प्रदेश में दर्ज हुआ, 65.9%।
सबसे ज़्यादा मतदाता लखीमपुर दक्षिण, उत्तर प्रदेश में थे, कुल 1,83,301 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
इस एकतरफ़ा जीत के अलावा विधान सभा में कई छोटे दलों और निर्दलीयों को भी थोड़ी-थोड़ी सीटें मिलीं।
8 दलों ने कम से कम एक सीट जीती, साथ में 14 निर्दलीय भी जीते।