नानपारा पूर्वविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1951–52
बीरेन्द्र बिक्रम सिंह (UPPP) ने 1951–52 के विधान सभा चुनाव में 30.7% वोट पाकर नानपारा पूर्व सीट जीती और हमीद उल्लाह खान (INC) को 1,937 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 से सीट नंबर 268 चरदा है।
विजेता
10.5% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बीरेन्द्र बिक्रम सिंह UPPP | UPPP | 5,64430.7% |
| 2 | हमीद उल्लाह खान | 3,70720.1% | |
| 3 | राम हर्ष निर्दलीय | निर्दलीय | 2,70714.7% |
| 4 | नेवाज़िश खान निर्दलीय | निर्दलीय | 1,7759.7% |
| 5 | सरजू प्रसाद | 1,5858.6% | |
| 6 | जगदीश सिंह KMPP | KMPP | 1,1366.2% |
| 7 | महादेव प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 8484.6% |
| 8 | हरमंगल सिंह SP | SP | 5062.8% |
| 9 | राम हर्ष | 4952.7% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 66% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.54 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।