सबसे आगे वही पार्टी, बहुमत किसी को नहीं
क्या हुआ
उत्तर प्रदेश में पहले वाली पार्टी ही सबसे ज़्यादा सीटें लेकर आगे रही, लेकिन फिर बहुमत से पीछे रह गई।
भारतीय जनता पार्टी ने कुल 424 सीटों में से 174 सीटें जीतीं।
इससे वह 213 सीटों के बहुमत के आँकड़े से पीछे रह गई, यानी सदन (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) रहा।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी ने 110 सीटें जीतीं।
क्या बदला
ऊपर से मिलती-जुलती दिखती इस तस्वीर के नीचे बहुत-सी अलग-अलग सीटों पर पार्टी बदली।
भाजपा की अपनी सीटें लगभग नहीं बदलीं: 177 से 174।
सबसे बड़ा बदलाव भाजपा से सपा की ओर रहा: 41 निर्वाचन क्षेत्र इसी तरह बदले।
लगभग 54.9% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला धौरहरा, उत्तर प्रदेश में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 122 वोट रहा।
दूसरी ओर, रामपुर ख़ास, उत्तर प्रदेश में विजेता की बढ़त दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार पर 79.0% वोट तक पहुँची, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर था।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) हरोरा, उत्तर प्रदेश में रहा, जहाँ यह 75.8% तक पहुँचा।
उस साल हर सीट पर औसतन 10.4 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
दो सबसे बड़े दलों के अलावा विधान सभा में कई छोटे दल भी पहुँचे।
12 दलों ने कम से कम एक सीट जीती, और निर्दलीयों ने 13 सीटें और जीतीं।