घोसीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1996
फागू (BJP) ने 1996 के विधान सभा चुनाव में 32.9% वोट पाकर घोसी सीट जीती और बेचन (BSP) को 3,611 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 208 देवरिया थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 208 सिकंदरपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। फागू 2.9% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | फागू | 41,02732.9% | |
| 2 | बेचन | 37,41630.0% | |
| 3 | जुल्फिकार अहमद संयुक्त मोर्चा | संयुक्त मोर्चा | 32,40026.0% |
| 4 | सुभाष चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 8,7437.0% |
| 5 | बलदेव AD | AD | 1,9441.6% |
| 6 | प्रेम BHJS | BHJS | 9850.8% |
| 7 | घनश्याम निर्दलीय | निर्दलीय | 7820.6% |
| 8 | राम नवल CPI(ML)(L) | CPI(ML)(L) | 5370.4% |
| 9 | राज कुमार NLP | NLP | 5160.4% |
| 10 | दूध नाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 3510.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.69 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
घोसी से कौन जीता, 1974–1996
BJP ने यह सीट BSP से छीन ली, जिसने इसे 1993 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह BJP की पहली जीत थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1993 के 52.3% से बढ़कर 53.3% हो गया।