मऊविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1996
मुख्तार अंसारी (BSP) ने 1996 के विधान सभा चुनाव में 46.9% वोट पाकर मऊ सीट जीती और विजय प्रताप सिंह (BJP) को 25,973 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 220 मार्टिनगंज थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 220 सैदपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — मुख्तार अंसारी 18.0% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मुख्तार अंसारी | 67,73146.9% | |
| 2 | विजय प्रताप सिंह | 41,75828.9% | |
| 3 | हाजी मोबीन ए. संयुक्त मोर्चा | संयुक्त मोर्चा | 22,17915.3% |
| 4 | अबुबकर निर्दलीय | निर्दलीय | 11,2667.8% |
| 5 | फूल चन्द BHJS | BHJS | 1,0190.7% |
| 6 | भीम निर्दलीय | निर्दलीय | 3030.2% |
| 7 | परमहंस निर्दलीय | निर्दलीय | 1300.1% |
| 8 | शिव शरण निर्दलीय | निर्दलीय | 1010.1% |
| 9 | रामशीष निर्दलीय | निर्दलीय | 740.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.01 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मऊ से कौन जीता, 1974–1996
BSP ने 1993 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 37.6% से बढ़कर 46.9% हो गया। यह 1985 के बाद यहाँ का सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1993 के 56.0% से बढ़कर 57.4% हो गया।