फतेहपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1996
हरदेव सिंह (SP) ने 1996 के विधान सभा चुनाव में 33.7% वोट पाकर फतेहपुर सीट जीती और राज रानी रावत (BJP) को 927 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 144 मसौली थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 144 मुजेहना है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
फतेहपुर का फ़ैसला सिर्फ़ 0.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 927 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | हरदेव सिंह संयुक्त मोर्चा | संयुक्त मोर्चा | 44,45433.7% |
| 2 | राज रानी रावत | 43,52733.0% | |
| 3 | सुरेश चन्द्र | 40,27630.5% | |
| 4 | कालिका प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3191.0% |
| 5 | राम सागर रावत BHJS | BHJS | 1,0070.8% |
| 6 | लल्लू निर्दलीय | निर्दलीय | 6340.5% |
| 7 | संत राम BSP(R) | BSP(R) | 3500.3% |
| 8 | श्याम लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 2280.2% |
| 9 | बुद्ध राम निर्दलीय | निर्दलीय | 2200.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.17 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
फतेहपुर से कौन जीता, 1974–1996
SP ने 1993 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 44.9% से घटकर 33.7% रह गया। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1993 के 56.3% से बढ़कर 59.6% हो गया।
- 1974नन्हे लाल (BKD), जीत का अंतर 5.3%
- 1977नन्हे लाल कुरील (JNP), जीत का अंतर 19.7%
- 1980जमुना प्रसाद (JNP(SC)), जीत का अंतर 4.5%
- 1985नत्था राम (INC), जीत का अंतर 13.7%
- 1989हरदेव सिंह (JD), जीत का अंतर 7.2%
- 1991हरदेव सिंह (JP), जीत का अंतर 4.0%
- 1993हरदेव सिंह (SP), जीत का अंतर 13.5%
- 1996हरदेव सिंह (SP), जीत का अंतर 0.7%