सबसे आगे नई पार्टी, बहुमत अब भी नहीं
क्या हुआ
इस बार (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा में उत्तर प्रदेश में एक दूसरी पार्टी सबसे ज़्यादा सीटें लेकर आगे रही।
समाजवादी पार्टी ने कुल 403 सीटों में से 143 सीटें जीतीं।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी बहुजन समाज पार्टी ने 98 सीटें जीतीं।
क्या बदला
राज्य का एक हिस्सा अलग राज्य बनने के बाद, छोटी हुई विधान सभा के साथ यह उत्तर प्रदेश का पहला चुनाव था।
जीतने वाली पार्टी की अपनी सीटें 110 से बढ़कर 143 हो गईं।
सबसे बड़ा बदलाव भारतीय जनता पार्टी से सपा की ओर रहा: 43 निर्वाचन क्षेत्र इसी तरह बदले।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला धानापुर, उत्तर प्रदेश में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 26 वोट रहा।
दूसरी ओर, कुण्डा, उत्तर प्रदेश में विजेता की बढ़त दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार पर 75.9% वोट तक पहुँची, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर था।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) ठाकुरद्वारा, उत्तर प्रदेश में रहा, 78.7%।
उस साल हर सीट पर औसतन 13.7 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
इससे उत्तर प्रदेश में उन चुनावों का सिलसिला और आगे बढ़ा जिनमें कोई एक पार्टी दूसरों के समर्थन के बिना सरकार नहीं चला सकती थी।
उत्तर प्रदेश का अपना नक्शा भी कुछ ही समय पहले बदला था: उसके उत्तरी पहाड़ी ज़िलों को अलग करके एक नया राज्य बनाया गया था।