भाजपा ने भारी जीत के साथ उत्तर प्रदेश बरक़रार रखा
क्या हुआ
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में फिर सत्ता जीती; यह भारी जीत थी, हालाँकि उसकी अपनी सीटें पिछले चुनाव से घट गईं।
उसने 403 सीटों में से 255 सीटें जीतीं।
इससे वह बहुमत के आँकड़े से 53 सीटें आगे रही।
भाजपा को 41.3% वोट मिले, जो फिर भी 63.3% सीटों में बदल गए।
समाजवादी पार्टी 32.1% वोट और 111 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
चुनाव प्रचार
19 अक्टूबर 2021 को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश के आने वाले चुनाव में पार्टी के 40% टिकट महिलाओं को दिए जाएँगे। 23 नवंबर को समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी से मुलाक़ात की और रालोद से हाथ मिलाया।12
जनवरी में तीन मंत्रियों समेत भाजपा के दस मौजूदा विधायक पाला बदलकर समाजवादी पार्टी में चले गए। इसके बाद चुनाव आयोग ने 10 फ़रवरी से 7 मार्च तक सात चरणों का कार्यक्रम तय किया, और गिनती 10 मार्च को रखी। पाँच दिन बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) ने सीटों के बँटवारे का समझौता पक्का किया, जिसमें निषाद पार्टी को 16 और अपना दल को 17 सीटें दी गईं, और बाक़ी सीटों पर भाजपा ख़ुद लड़ी।345
8 फ़रवरी को, पहले चरण के मतदान से पहले, भाजपा ने अपना घोषणापत्र ‘लोक संकल्प पत्र’ जारी किया, और समाजवादी पार्टी ने भी उसी दिन अपना घोषणापत्र जारी किया। 8 मार्च को वाराणसी में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ईवीएम ले जा रहे एक ट्रक को रोका, और चुनाव आयोग ने शहर के अपर ज़िलाधिकारी को निलंबित कर दिया। अगले दिन बरेली, मुरादाबाद और सोनभद्र में कूड़ा ढोने वाली गाड़ियों में चुनाव सामग्री मिली, और आयोग ने दो और मजिस्ट्रेटों को निलंबित कर दिया।678
क्या बदला
भाजपा सरकार में बनी रही, हालाँकि सपा के आगे बढ़ने से उसकी अपनी सीटें घट गईं।
उसकी सीटें पिछले चुनाव से 57 घट गईं, जबकि उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) में +1.6 प्रतिशत अंक का बदलाव आया।
सपा के मतों के हिस्से में +10.2 प्रतिशत अंक का बदलाव हुआ, जो किसी भी बड़ी पार्टी में सबसे तेज़ था।
सबसे बड़ा बदलाव भाजपा से सपा की ओर रहा: पूरे राज्य में जिन 125 सीटों पर पार्टी बदली, उनमें से 59 इसी तरह बदलीं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) पिछले चुनाव के मुक़ाबले 0.5 प्रतिशत अंक घटा।
अहम आँकड़े
इस चुनाव का सबसे कड़ा मुक़ाबला धामपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ: विजेता की (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 203 वोट था।
इस चुनाव में सबसे बड़ा जीत का अंतर नोएडा, उत्तर प्रदेश में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 52.1% वोट आगे रहा।
किसी भी सीट से ज़्यादा मतदान प्रतिशत नकुड़, उत्तर प्रदेश में दर्ज हुआ, जहाँ 76.1% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से साहिबाबाद, उत्तर प्रदेश राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जिसकी मतदाता सूची में 10,24,210 नाम थे।
राज्य में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार प्रतापपुर, उत्तर प्रदेश में उतरे, बैलट पर 25 नाम थे।
पूरे राज्य में (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) को 6,37,304 वोट मिले, यानी कुल डाले गए वोटों का 0.7%।
पृष्ठभूमि
मुलायम सिंह यादव ने जनता दल से अलग होने के बाद 4 अक्टूबर 1992 को लखनऊ में साथी समाजवादी नेता बेनी प्रसाद वर्मा के साथ मिलकर समाजवादी पार्टी की स्थापना की।9
उत्तर प्रदेश की अपनी विधान सभा का रूप पहले भी एक बार बदल चुका था: 2000 में राज्य के उत्तरी पहाड़ी ज़िलों को अलग करके उत्तराखंड बनाया गया, और अगले चुनाव में उसकी सीटें 425 से घटकर 403 रह गईं।10
मायावती के नेतृत्व में बहुजन समाज पार्टी ने 2007 में साफ़ बहुमत जीता, और उसी मई में उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली; 1991 के बाद राज्य में यह पहली सरकार थी जो गठबंधन के समर्थन के बिना चली।11