एक सदस्य, एक सीट
क्या हुआ
उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी की जीत का सिलसिला जारी रहा, हालाँकि सीटों में उसका हिस्सा पहले से घट गया।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 249 सीटें जीतीं; इस तरह वह लगातार 3 चुनाव जीत चुकी थी।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 36.3% रहा।
अखिल भारतीय जनसंघ अब 49 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष थी।
क्या बदला
यह उत्तर प्रदेश का पहला चुनाव था जिसमें हर निर्वाचन क्षेत्र ने सिर्फ़ एक सदस्य चुना।
विधान सभा की 430 सीटें 430 निर्वाचन क्षेत्रों से भरी गईं — हर क्षेत्र से एक सीट।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) में भी पिछले चुनाव के मुक़ाबले +2.1 प्रतिशत अंक का बदलाव हुआ।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: देवगांव, उत्तर प्रदेश का फ़ैसला सिर्फ़ 8 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, किसी भी सीट पर सबसे बड़ा जीत का अंतर रानीखेत दक्षिण, उत्तर प्रदेश में रहा, 72.3% वोट।
उस साल किसी भी सीट से ज़्यादा उम्मीदवार फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश में उतरे, कुल 17।
सबसे ज़्यादा मतदाता कानपुर शहर II, उत्तर प्रदेश में थे, कुल 1,23,845 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव में कुछ छोटे दलों ने पहली बार जीत दर्ज की।
सोशलिस्ट पार्टी, स्वतंत्र पार्टी और रिपब्लिकन ने पहली बार एक-एक सीट जीती।