इन्हौनाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1962
पशुपतिनाथ सरन सिंह (निर्दलीय) ने 1962 के विधान सभा चुनाव में 66.0% वोट पाकर इन्हौना सीट जीती और राम नरेश सिंह (INC) को 21,485 वोटों से हराया।
1962 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 में सीट नंबर 109 खैरागढ़ थी। 1962 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1967 से सीट नंबर 109 राय बरेली है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — पशुपतिनाथ सरन सिंह 54.6% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | पशुपतिनाथ सरन सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 25,97866.0% |
| 2 | राम नरेश सिंह | 4,49311.4% | |
| 3 | राम कुमार SOC | SOC | 3,93010.0% |
| 4 | उस्मान खान निर्दलीय | निर्दलीय | 1,9895.0% |
| 5 | गजाधर प्रसाद | 1,4143.6% | |
| 6 | राम भरोसे निर्दलीय | निर्दलीय | 7141.8% |
| 7 | राम स्वरूप निर्दलीय | निर्दलीय | 5611.4% |
| 8 | सूर्य नारायण | 2760.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय और INC को 77% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.16 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।