हाथरसविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1962
नन्द कुमार देव वशिष्ठ (INC) ने 1962 के विधान सभा चुनाव में 28.4% वोट पाकर हाथरस सीट जीती और गजाधर सिंह (CPI) को 4,269 वोटों से हराया।
1962 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 में कोई सीट नंबर 376 नहीं थी। 1962 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1967 से सीट नंबर 376 अलीगढ़ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
10.7% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | नन्द कुमार देव वशिष्ठ | 11,37428.4% | |
| 2 | गजाधर सिंह वाम दल | वाम दल | 7,10517.8% |
| 3 | राम मूर्ति शर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 4,03410.1% |
| 4 | किशन लाल | 3,9539.9% | |
| 5 | शंकर लाल दुबे निर्दलीय | निर्दलीय | 3,8559.6% |
| 6 | मक्खन निर्दलीय | निर्दलीय | 2,4246.1% |
| 7 | कुंज बिहारी लाल SOC | SOC | 2,2725.7% |
| 8 | लीलाधर निर्दलीय | निर्दलीय | 2,0135.0% |
| 9 | बी. रे नारायण | 2,0045.0% | |
| 10 | गोवर्धन दास RRP | RRP | 9912.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को सिर्फ़ 56% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 6.49 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।