गोकुलविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1962
कन्हैया लाल (INC) ने 1962 के विधान सभा चुनाव में 41.9% वोट पाकर गोकुल सीट जीती और राजा राम (BJS) को 7,429 वोटों से हराया।
1962 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 में कोई सीट नंबर 374 नहीं थी। 1962 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1967 से सीट नंबर 374 गंगीरी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — कन्हैया लाल 23.2% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | कन्हैया लाल | 13,39241.9% | |
| 2 | राजा राम | 5,96318.6% | |
| 3 | बाबू स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 3,72011.6% |
| 4 | मान सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2,3067.2% |
| 5 | बृज लाल SOC | SOC | 1,9476.1% |
| 6 | बेनी राम REP | REP | 1,8785.9% |
| 7 | गंगा प्रसाद | 1,0413.3% | |
| 8 | निहाल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0313.2% |
| 9 | शिव प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 6992.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 72% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.19 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।