फिर त्रिशंकु
क्या हुआ
वही पार्टी फिर सबसे ज़्यादा सीटों के साथ आगे रही, लेकिन एक बार फिर बहुमत से पीछे रह गई।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 425 सीटों में से 211 सीटें जीतीं।
यह फिर एक (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा थी।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 33.7% रहा।
क्या बदला
सबसे आगे की पार्टी वही रहने के बावजूद पिछले चुनाव के बाद से विधान सभा की बनावट लगभग पूरी तरह बदल गई।
तुलना की गई 425 सीटों में से 306 सीटों पर पार्टी बदली।
सबसे साफ़ बदलाव भारतीय जनसंघ से कांग्रेस की ओर रहा, जिसने इनमें से 67 सीटें हासिल कीं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: बिधूना, उत्तर प्रदेश का फ़ैसला सिर्फ़ 4 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
उस साल किसी भी सीट से ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) चांदपुर, उत्तर प्रदेश में दर्ज हुआ, 76.1%।
सबसे ज़्यादा मतदाता छिबरामऊ, उत्तर प्रदेश में थे, कुल 1,33,524 पंजीकृत मतदाता।
उस साल किसी भी सीट से ज़्यादा उम्मीदवार आगरा पूर्व, उत्तर प्रदेश में उतरे, कुल 17।
पृष्ठभूमि
सबसे आगे की दो पार्टियों के अलावा विधान सभा में कई छोटे खिलाड़ी भी पहुँचे।
12 दलों ने कम से कम एक सीट जीती, और निर्दलीयों ने 18 सीटें और जीतीं।