मऊविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1969
हबीबुर रहमान (BKD) ने 1969 के विधान सभा चुनाव में 23.5% वोट पाकर मऊ सीट जीती और एम. ए. बाक़ी (CPI) को 3,195 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 225 सरायमीर थी। 1969 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1974 से सीट नंबर 225 बांसडीह है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। हबीबुर रहमान 4.8% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | हबीबुर रहमान | 15,81023.5% | |
| 2 | एम. ए. बाक़ी वाम दल | वाम दल | 12,61518.8% |
| 3 | पदमनाथ | 12,60818.8% | |
| 4 | वृज मोहन Bharatiya Jana Sangh | Bharatiya Jana Sangh | 12,09918.0% |
| 5 | फूल चन्द | 5,7618.6% | |
| 6 | विश्वनाथ SOC | SOC | 5,0327.5% |
| 7 | झाकरी | 1,8162.7% | |
| 8 | उदय नारायण | 1,0321.5% | |
| 9 | राम दत्त सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4330.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 61% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.81 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मऊ से कौन जीता, 1967–1969
BKD ने यह सीट BJS से छीन ली, जिसने इसे 1967 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1967 के 64.3% से घटकर 62.7% रह गया।
- 1967बी. एम. डी. अग्रवाल (BJS), जीत का अंतर 9.8%
- 1969हबीबुर रहमान (BKD), जीत का अंतर 4.8%