हापुड़विधान सभा चुनाव का परिणाम, 1969
लक्ष्मण स्वरूप (BKD) ने 1969 के विधान सभा चुनाव में 38.1% वोट पाकर हापुड़ सीट जीती और वीर सेन (INC) को 6,777 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 394 सिकंदराबाद थी। 1969 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1974 से सीट नंबर 394 हस्तिनापुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
9.7% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | लक्ष्मण स्वरूप | 26,74338.1% | |
| 2 | वीर सेन | 19,96628.4% | |
| 3 | देवी दयाल सेन | 17,48824.9% | |
| 4 | सतीश चन्द Bharatiya Jana Sangh | Bharatiya Jana Sangh | 2,8984.1% |
| 5 | मंगल सेन परचा स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 1,8202.6% |
| 6 | नाथी | 1,0931.6% | |
| 7 | जैंती प्रसाद PBI | PBI | 1660.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.44 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
हापुड़ से कौन जीता, 1967–1969
BKD ने यह सीट RPI से छीन ली, जिसने इसे 1967 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1967 के 66.0% से घटकर 63.4% रह गया।
- 1967डी.डी. सैन (RPI), जीत का अंतर 1.9%
- 1969लक्ष्मण स्वरूप (BKD), जीत का अंतर 9.7%