इमरजेंसी के बाद की लहर
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस उत्तर प्रदेश की सत्ता से भारी अंतर से बाहर हो गई; उसे एक नई बनी विपक्षी पार्टी ने हराया।
जनता पार्टी ने कुल 425 सीटों में से 352 सीटें जीतीं।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 139 सीटें ज़्यादा था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस सिर्फ़ 47 सीटें जीत पाई — पहले सरकार चला चुकी इस पार्टी का यह भारी पतन था।
क्या बदला
यह उत्तर प्रदेश की नई विधान सभा सीमाओं पर हुआ पहला चुनाव भी था।
ये सीमाएँ एक (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) से आई थीं — यानी निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का वह आधिकारिक पुनर्निर्धारण, जो भारत की आबादी में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है।
जीतने वाली पार्टी उत्तर प्रदेश के पिछले चुनाव के समय अस्तित्व में ही नहीं थी; वह 0 सीटों से 352 सीटों पर पहुँची।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: मसूरी, उत्तर प्रदेश में (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 42 वोट रहा।
दूसरी ओर, इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर छपरौली, उत्तर प्रदेश में रहा, जहाँ विजेता 68.5% वोटों से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) गरौठा, उत्तर प्रदेश में रहा, 69.4%।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार अयोध्या, उत्तर प्रदेश में उतरे, बैलट पर 20 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव देश भर में इमरजेंसी शासन और प्रेस सेंसरशिप के दौर के बाद हुआ।