हस्तिनापुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1977
रेवती शरण मौर्य (JNP) ने 1977 के विधान सभा चुनाव में 45.3% वोट पाकर हस्तिनापुर सीट जीती और झग्गर सिंह (INC) को 422 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 394 हापुड़ थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 394 बघरा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
हस्तिनापुर का फ़ैसला सिर्फ़ 0.6% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 422 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रेवती शरण मौर्य जनता | जनता | 31,17045.3% |
| 2 | झग्गर सिंह | 30,74844.6% | |
| 3 | टीकम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4,5696.6% |
| 4 | छत्र पाल सिंह RPK | RPK | 1,0481.5% |
| 5 | हरभजन सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 8241.2% |
| 6 | बुध प्रकाश निर्दलीय | निर्दलीय | 5050.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
JNP, INC और एक निर्दलीय को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.44 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
हस्तिनापुर से कौन जीता, 1974–1996
JNP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1974 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1974 के 61.6% से घटकर 59.0% रह गया। इसके बाद 1980 के चुनाव में यह सीट INC(I) ने जीती।