फिर बहुमत
क्या हुआ
उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी की जीत का सिलसिला जारी रहा, और इस बार उसने अपने दम पर बहुमत भी पाया।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 424 सीटों में से 215 सीटें जीतीं।
यह बहुमत के 213 सीटों के आँकड़े को पार करने के लिए काफ़ी था।
इसके साथ उत्तर प्रदेश में वह लगातार 6 चुनाव जीत चुकी थी।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी भारतीय क्रांति दल ने 106 सीटें जीतीं।
क्या बदला
इस चुनाव और पिछले चुनाव के बीच सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गई थीं, इसलिए हर सीट पर हुए बदलाव गिने नहीं जा सकते।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: रॉबर्ट्सगंज, उत्तर प्रदेश का फ़ैसला सिर्फ़ 21 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
उस साल किसी भी सीट से ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) ठाकुरद्वारा, उत्तर प्रदेश में दर्ज हुआ, 75.1%।
दूसरे छोर पर दीक्षिर, उत्तर प्रदेश में उस साल किसी भी सीट का सबसे कम मतदान प्रतिशत दर्ज हुआ, सिर्फ़ 29.4%।
उस साल किसी भी सीट से ज़्यादा उम्मीदवार हरदोई, उत्तर प्रदेश में उतरे, कुल 24।
पृष्ठभूमि
सबसे आगे की दो पार्टियों के अलावा बाक़ी विधान सभा काफ़ी बिखरी हुई रही।
12 दलों ने कम से कम एक सीट जीती, और निर्दलीयों ने सिर्फ़ 5 सीटें और जोड़ीं।