खतौलीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1969
वीरेन्द्र वर्मा (BKD) ने 1969 के विधान सभा चुनाव में 40.7% वोट पाकर खतौली सीट जीती और राजेन्द्र दत्ता (INC) को 6,849 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 407 कोताना थी। 1969 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1974 से सीट नंबर 407 मोरना है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
9.8% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | वीरेन्द्र वर्मा | 28,60540.7% | |
| 2 | राजेन्द्र दत्ता | 21,75631.0% | |
| 3 | गंगा सहाय Bharatiya Jana Sangh | Bharatiya Jana Sangh | 5,9188.4% |
| 4 | इफ्तिखारुल हक KMP | KMP | 5,9018.4% |
| 5 | वीर नारायण सिंह | 5,3787.7% | |
| 6 | शमशाद स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 1,5272.2% |
| 7 | कालू राम PBI | PBI | 7061.0% |
| 8 | अमीरूद्दीन तूफ़ानी निर्दलीय | निर्दलीय | 4890.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 80% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.54 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1974 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1974 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
खतौली से कौन जीता, 1967–1969
BKD ने यह सीट CPI से छीन ली, जिसने इसे 1967 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1967 के 59.4% से बढ़कर 66.7% हो गया।
- 1967एस. सिंह (CPI), जीत का अंतर 1.3%
- 1969वीरेन्द्र वर्मा (BKD), जीत का अंतर 9.8%