बद्रीकेदारविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1996
केदार सिंह फोनिया (BJP) ने 1996 के विधान सभा चुनाव में 47.8% वोट पाकर बद्रीकेदार सीट जीती और सत्येन्द्र सिंह बर्तवाल (AIIC(T)) को 23,524 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 7 कर्णप्रयाग थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 7 चांदपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — केदार सिंह फोनिया 23.4% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | केदार सिंह फोनिया | 48,13847.8% | |
| 2 | सत्येन्द्र सिंह बर्तवाल AIIC(T) | AIIC(T) | 24,61424.5% |
| 3 | शरद भूषण सिंह | 19,28919.2% | |
| 4 | गोविन्द सिंह रावत संयुक्त मोर्चा | संयुक्त मोर्चा | 4,1234.1% |
| 5 | इन्द्र भूषण भंडारी UKKD | UKKD | 1,4401.4% |
| 6 | गज पाल सिंह गुसाईं निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1411.1% |
| 7 | खुशहाल सिंह BHJS | BHJS | 8440.8% |
| 8 | लक्ष्मी प्रसाद गौड़ BLTP | BLTP | 8180.8% |
| 9 | भागवत प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 2200.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.05 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बद्रीकेदार से कौन जीता, 1974–1996
BJP ने यहाँ लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1991 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 37.7% से बढ़कर 47.8% हो गया। यह 1977 के बाद यहाँ का सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1993 के 50.7% से घटकर 44.4% रह गया।
- 1974नरेन्द्र सिंह (INC), जीत का अंतर 34.8%
- 1977प्रताप सिंह (JNP), जीत का अंतर 32.5%
- 1980कुंवर सिंह नेगी (IND), जीत का अंतर 14.7%
- 1985संतन बड़थ्वाल (INC), जीत का अंतर 6.0%
- 1989कुंवर सिंह नेगी (INC), जीत का अंतर 2.5%
- 1991केदार सिंह फोनिया (BJP), जीत का अंतर 7.2%
- 1993केदार सिंह फोनिया (BJP), जीत का अंतर 10.5%
- 1996केदार सिंह फोनिया (BJP), जीत का अंतर 23.4%