कुण्डाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1996
कुंवर रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया (निर्दलीय) ने 1996 के विधान सभा चुनाव में 80.0% वोट पाकर कुण्डा सीट जीती और शिव नारायण मिश्रा (BJP) को 80,741 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 114 रोखा थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 114 अकबरपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — कुंवर रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया 65.4% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | कुंवर रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया निर्दलीय | निर्दलीय | 98,70080.0% |
| 2 | शिव नारायण मिश्रा | 17,95914.6% | |
| 3 | जिया लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 2,2621.8% |
| 4 | जग देव AD | AD | 1,6941.4% |
| 5 | बद्री प्रसाद BHJS | BHJS | 9360.8% |
| 6 | संतराम निर्दलीय | निर्दलीय | 5040.4% |
| 7 | अक्षय प्रताप सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4490.4% |
| 8 | दिनेश निर्दलीय | निर्दलीय | 4460.4% |
| 9 | रामसरन निर्दलीय | निर्दलीय | 3810.3% |
| 10 | सिपाही लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1060.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय और BJP को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 1.51 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कुण्डा से कौन जीता, 1974–1996
1993 की तरह इस बार भी यहाँ एक निर्दलीय उम्मीदवार जीता। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1993 के 64.4% से घटकर 53.6% रह गया।
- 1974नियाज हुसन खान (NCO), जीत का अंतर 17.2%
- 1977शशि प्रभा (JNP), जीत का अंतर 15.4%
- 1980नियाज़ हसन खान (INC(I)), जीत का अंतर 16.8%
- 1985नियाज़ हसन (INC), जीत का अंतर 41.9%
- 1989नियाज़ हसन (INC), जीत का अंतर 14.7%
- 1991शिव नारायण मिश्रा (BJP), जीत का अंतर 2.6%
- 1993कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया (IND), जीत का अंतर 52.3%
- 1996कुंवर रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया (IND), जीत का अंतर 65.4%