देवरिया उत्तर पूर्वविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1951–52
एम. फ़ारूक़ चिश्ती (INC) ने 1951–52 के विधान सभा चुनाव में 40.5% वोट पाकर देवरिया उत्तर पूर्व सीट जीती और रोज मोहम्मद (SP) को 6,683 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 से सीट नंबर 318 हसनगंज है।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — एम. फ़ारूक़ चिश्ती 27.9% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | एम. फ़ारूक़ चिश्ती | 9,69220.8% | |
| 2 | रोज मोहम्मद SP | SP | 3,0096.5% |
| 3 | समरजीत राव | 2,2514.8% | |
| 4 | हरख चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 1,9884.3% |
| 5 | कमला कान्त RRP | RRP | 1,6943.6% |
| 6 | कस्तूरीपति KMPP | KMPP | 1,4223.0% |
| 7 | तीर्थ राज निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3783.0% |
| 8 | जमुना निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3672.9% |
| 9 | सालिकग्राम | 1,1252.4% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को सिर्फ़ 32% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 17.84 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।