नागलविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1993
मामचंद (BJP) ने 1993 के विधान सभा चुनाव में 38.8% वोट पाकर नागल सीट जीती और धर्म सिंह (JD) को 18,477 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 415 सरसावा थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से कोई सीट नंबर 415 नहीं है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — मामचंद 15.3% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
15 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मामचंद | 46,92138.8% | |
| 2 | धर्म सिंह जनता दल | जनता दल | 28,44423.5% |
| 3 | जगपाल सिंह | 27,48022.7% | |
| 4 | इसम सिंह | 11,5259.5% | |
| 5 | मेमपाल सिंह JP | JP | 1,0060.8% |
| 6 | किशन लाल BRED | BRED | 8600.7% |
| 7 | दिलीप निर्दलीय | निर्दलीय | 7790.6% |
| 8 | राजेन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 7600.6% |
| 9 | सोमदत्त निर्दलीय | निर्दलीय | 7030.6% |
| 10 | अजब सिंह | 7020.6% | |
| 11 | सुनील BRP | BRP | 6580.5% |
| 12 | यशपाल निर्दलीय | निर्दलीय | 4290.3% |
| 13 | कृष्ण पाल | 2950.2% | |
| 14 | बालेश बवानिया निर्दलीय | निर्दलीय | 2520.2% |
| 15 | राजवीर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1000.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 85% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.75 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
नागल से कौन जीता, 1974–1996
BJP ने 1991 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 40.3% से घटकर 38.8% रह गया। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1991 के 54.5% से बढ़कर 61.8% हो गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में यह सीट BSP ने जीती।