सिकंदराबादविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1993
वीरेन्द्र पाल सिंह (BJP) ने 1993 के विधान सभा चुनाव में 36.4% वोट पाकर सिकंदराबाद सीट जीती और नरेन्द्र सिंह भाटी (JD) को 3,481 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 386 स्याना थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 386 बरनावा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। वीरेन्द्र पाल सिंह 2.8% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
25 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | वीरेन्द्र पाल सिंह | 44,90436.4% | |
| 2 | नरेन्द्र सिंह भाटी जनता दल | जनता दल | 41,42333.6% |
| 3 | जगवीर | 18,63615.1% | |
| 4 | सुरेन्द्र पाल सिंह | 14,38411.7% | |
| 5 | संजय सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0960.9% |
| 6 | वीरेन्द्र सिंह पुत्र दीप सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3920.3% |
| 7 | वेबीर सिंह JP | JP | 3180.3% |
| 8 | नेमचंद निर्दलीय | निर्दलीय | 2470.2% |
| 9 | राम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2330.2% |
| 10 | धर्म सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2310.2% |
| 11 | राम चन्द्र | 2050.2% | |
| 12 | सिंह राज निर्दलीय | निर्दलीय | 1740.1% |
| 13 | अरुणा सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1670.1% |
| 14 | वीरेन्द्र सिंह पुत्र हीरी सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1420.1% |
| 15 | सुरेन्द्र पुत्र बेगराज निर्दलीय | निर्दलीय | 1010.1% |
| 16 | यादराम निर्दलीय | निर्दलीय | 930.1% |
| 17 | विनोद निर्दलीय | निर्दलीय | 880.1% |
| 18 | अर्जुन सिंह | 860.1% | |
| 19 | बासिकुर रहमान निर्दलीय | निर्दलीय | 760.1% |
| 20 | सुरेन्द्र पुत्र जगत राम निर्दलीय | निर्दलीय | 690.1% |
| 21 | काका जोगिंदर सिंह उर्फ़ धरती पकड़ निर्दलीय | निर्दलीय | 610.1% |
| 22 | हरबीर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 520.0% |
| 23 | राम लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 410.0% |
| 24 | राजवीर निर्दलीय | निर्दलीय | 260.0% |
| 25 | साजिद अली निर्दलीय | निर्दलीय | 180.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 85% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.54 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सिकंदराबाद से कौन जीता, 1974–1996
BJP ने यह सीट JD से छीन ली, जिसने इसे 1991 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह BJP की पहली जीत थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1991 के 52.7% से बढ़कर 60.8% हो गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में यह सीट SP ने जीती।
- 1974वीरेन्द्र सरूप भटनागर (INC), जीत का अंतर 14.5%
- 1977प्रताप सिंह (JNP), जीत का अंतर 26.9%
- 1980यश पाल सिंह (INC(I)), जीत का अंतर 7.0%
- 1985राजेन्द्र सिंह सोलंकी (INC), जीत का अंतर 25.5%
- 1989नरेन्द्र सिंह (JD), जीत का अंतर 22.5%
- 1991नरेन्द्र सिंह भाटी (JD), जीत का अंतर 15.4%
- 1993वीरेन्द्र पाल सिंह (BJP), जीत का अंतर 2.8%
- 1996नरेन्द्र सिंह भाटी (SP), जीत का अंतर 0.6%