अल्मोड़ाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1993
गोविन्द सिंह कुँजवाल (INC) ने 1993 के विधान सभा चुनाव में 43.0% वोट पाकर अल्मोड़ा सीट जीती और पूरन चन्द्र शर्मा (BJP) को 6,490 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 10 पिथौरागढ़ थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 10 हसनपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
8.3% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | गोविन्द सिंह कुँजवाल | 33,85043.0% | |
| 2 | पूरन चन्द्र शर्मा | 27,36034.8% | |
| 3 | बिपिन चन्द्र त्रिपाठी UKD | UKD | 10,30313.1% |
| 4 | पोपल सिंह जीना समाजवादी पार्टी | समाजवादी पार्टी | 1,9422.5% |
| 5 | गिरीश चन्द्र जोशी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5201.9% |
| 6 | दया किशन निर्दलीय | निर्दलीय | 9861.3% |
| 7 | जग मोहन | 9271.2% | |
| 8 | मोहन राम आर्य निर्दलीय | निर्दलीय | 7581.0% |
| 9 | शेर सिंह धौनी जनता दल | जनता दल | 4590.6% |
| 10 | बची सिंह कंवल निर्दलीय | निर्दलीय | 4100.5% |
| 11 | किशन चन्द्र पन्त निर्दलीय | निर्दलीय | 1200.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.08 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
अल्मोड़ा से कौन जीता, 1974–1996
INC ने यह सीट BJP से छीन ली, जिसने इसे 1991 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1989 में जीत दर्ज की थी। यह 1980 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1991 के 38.3% से बढ़कर 42.1% हो गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।
- 1974रामा (INC), जीत का अंतर 3.5%
- 1977शोभन सिंह जीणा (JNP), जीत का अंतर 29.9%
- 1980गोवर्धन (INC(I)), जीत का अंतर 5.8%
- 1985सरस्वती देवी (INC), जीत का अंतर 16.5%
- 1989सरस्वती तिवारी (INC), जीत का अंतर 14.4%
- 1991पूरन चन्द्र शर्मा (BJP), जीत का अंतर 9.6%
- 1993गोविन्द सिंह कुँजवाल (INC), जीत का अंतर 8.3%
- 1996रघुनाथ सिंह चौहान (BJP), जीत का अंतर 20.1%