सरेनीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1993
गिरीश नारायण पांडे (BJP) ने 1993 के विधान सभा चुनाव में 30.4% वोट पाकर सरेनी सीट जीती और अशोक कुमार (SP) को 1,881 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में भी सीट नंबर 111 का नाम सरेनी था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 111 चांदा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सरेनी का फ़ैसला सिर्फ़ 1.6% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 1,881 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
22 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | गिरीश नारायण पांडे | 36,83530.4% | |
| 2 | अशोक कुमार समाजवादी पार्टी | समाजवादी पार्टी | 34,95428.8% |
| 3 | इन्द्रेश विक्रम सिंह | 24,10819.9% | |
| 4 | अशोक सिंह जनता दल | जनता दल | 17,38214.3% |
| 5 | बाबो लाल वर्मा | 4,0013.3% | |
| 6 | कमलेश निर्दलीय | निर्दलीय | 5420.5% |
| 7 | देवराज द्विवेदी JP | JP | 4550.4% |
| 8 | कमल चन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 3840.3% |
| 9 | रामा शंकर निर्दलीय | निर्दलीय | 3440.3% |
| 10 | विजय कुमार पासी निर्दलीय | निर्दलीय | 3390.3% |
| 11 | राम सजीवन निर्दलीय | निर्दलीय | 2850.2% |
| 12 | गीरेंद्र निर्दलीय | निर्दलीय | 2800.2% |
| 13 | जगदेव प्रसाद यादव | 2360.2% | |
| 14 | सत्रोहन सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2230.2% |
| 15 | राजेन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 2130.2% |
| 16 | शंकर दयाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1890.2% |
| 17 | जगत नारायण निर्दलीय | निर्दलीय | 1450.1% |
| 18 | देवेन्द्र कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 1250.1% |
| 19 | सुख राम निर्दलीय | निर्दलीय | 1160.1% |
| 20 | राम आसरे निर्दलीय | निर्दलीय | 1020.1% |
| 21 | होरी लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 610.1% |
| 22 | शिव लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 550.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 79% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.23 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सरेनी से कौन जीता, 1974–1996
BJP ने 1991 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 26.6% से बढ़कर 30.4% हो गया। मतदान प्रतिशत 1991 के 46.3% से बढ़कर 60.3% हो गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में यह सीट SP ने जीती।
- 1974शिवा शंकर सिंह (INC), जीत का अंतर 8.2%
- 1977सुनीता चौहान (INC), जीत का अंतर 5.8%
- 1980सुनीता चौहान (INC(I)), जीत का अंतर 33.5%
- 1985सुरेन्द्र बहादुर सिंह (IND), जीत का अंतर 36.1%
- 1989इन्द्रेश विक्रम (INC), जीत का अंतर 12.9%
- 1991गिरीश नारायण पाण्डेय (BJP), जीत का अंतर 0.6%
- 1993गिरीश नारायण पांडे (BJP), जीत का अंतर 1.6%
- 1996अशोक कुमार सिंह (SP), जीत का अंतर 4.5%