सकीटविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
वीरेन्द्र सिंह (JNP) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 25.4% वोट पाकर सकीट सीट जीती और हरि सिंह शाक्य (INC) को 2,237 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 345 घिरोर थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 345 फतेहपुर सीकरी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। वीरेन्द्र सिंह 3.8% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | वीरेन्द्र सिंह जनता | जनता | 15,10925.4% |
| 2 | हरि सिंह शाक्य | 12,87221.6% | |
| 3 | सूरन सिंह शाक्य | 9,77616.4% | |
| 4 | देवेन्द्र सिंह कुशवाहा Lok Dal | Lok Dal | 9,22615.5% |
| 5 | बाबा रामनाथ सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4,8278.1% |
| 6 | मोहनलाल वर्मा | 4,0866.8% | |
| 7 | ऋषिराम दुबे निर्दलीय | निर्दलीय | 2,6234.4% |
| 8 | कैलाश निर्दलीय | निर्दलीय | 3950.7% |
| 9 | ओम प्रकाश यादव ICJ | ICJ | 3450.6% |
| 10 | जगदीश सिंह चौहान निर्दलीय | निर्दलीय | 2320.4% |
| 11 | प्रेम सिंह चौहान निर्दलीय | निर्दलीय | 1220.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 63% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.71 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सकीट से कौन जीता, 1974–1996
JNP ने यह सीट INC(I) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; JNP ने यहाँ पिछली बार 1977 में जीत दर्ज की थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1980 के 50.0% से घटकर 44.2% रह गया। इसके बाद 1989 के चुनाव में यह सीट JD ने जीती।
- 1974प्यारे लाल (BJS), जीत का अंतर 6.8%
- 1977प्यारे लाल (JNP), जीत का अंतर 14.7%
- 1980नेत्रपाल सिंह (INC(I)), जीत का अंतर 13.0%
- 1985वीरेन्द्र सिंह (JNP), जीत का अंतर 3.8%
- 1989वीरेन्द्र सिंह (JD), जीत का अंतर 3.5%
- 1991सूरज सिंह शाक्य (BJP), जीत का अंतर 5.1%
- 1993सूरज सिंह (BJP), जीत का अंतर 7.3%
- 1996वीरेन्द्र सिंह (SP), जीत का अंतर 11.5%