धुरियापारविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
अच्युत नन्द तिवारी (निर्दलीय) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 27.1% वोट पाकर धुरियापार सीट जीती और शिव बिहारी ओझा (INC) को 3,400 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 180 रूधौली थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 180 हाटा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। अच्युत नन्द तिवारी 4.5% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
18 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अच्युत नन्द तिवारी निर्दलीय | निर्दलीय | 20,30827.1% |
| 2 | शिव बिहारी ओझा | 16,90822.5% | |
| 3 | शैलेन्द्र प्रताप शाही उर्फ़ मुन्नी शाही | 9,98613.3% | |
| 4 | बलिंद्र सिंह जनता | जनता | 5,7677.7% |
| 5 | तुफैल अहमद (फ़ना) निर्दलीय | निर्दलीय | 5,1616.9% |
| 6 | सुरेश राय वाम दल | वाम दल | 3,8665.2% |
| 7 | राधे श्याम Lok Dal | Lok Dal | 3,1004.1% |
| 8 | कपिल देव ICJ | ICJ | 2,4303.2% |
| 9 | इन्द्र नाथ सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,2611.7% |
| 10 | ध्रुव दुबे निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0681.4% |
| 11 | चन्द्र भूषण शुक्ला निर्दलीय | निर्दलीय | 9841.3% |
| 12 | शिव चरण निर्दलीय | निर्दलीय | 8201.1% |
| 13 | राम किशन | 7891.1% | |
| 14 | सुरेन्द्र प्रताप चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 7381.0% |
| 15 | चंगुर प्रसाद त्रिपाठी निर्दलीय | निर्दलीय | 5410.7% |
| 16 | बशिशित निर्दलीय | निर्दलीय | 4880.7% |
| 17 | राज बंशी सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4290.6% |
| 18 | बुद्धि राम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4050.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 63% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 6.29 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
धुरियापार से कौन जीता, 1974–1996
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट INC(U) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत लगभग 1980 जितना ही रहा: 47.7%। इसके बाद 1989 के चुनाव में यह सीट JD ने जीती।
- 1974चन्द्र शेखर (INC), जीत का अंतर 18.0%
- 1977जगदीश प्रसाद (JNP), जीत का अंतर 6.6%
- 1980मार्केंण्डे चन्द (INC(U)), जीत का अंतर 8.3%
- 1985अच्युत नन्द तिवारी (IND), जीत का अंतर 4.5%
- 1989मार्केंण्डे चन्द (JD), जीत का अंतर 10.5%
- 1991मार्केंण्डे चन्द (JD), जीत का अंतर 3.1%
- 1993मोहसिन (BSP), जीत का अंतर 4.0%
- 1996मार्केंण्डे चन्द (BSP), जीत का अंतर 3.1%