गंगीरीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
तिलक सिंह (INC) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 39.9% वोट पाकर गंगीरी सीट जीती और बाबू सिंह (LKD) को 268 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 371 हाथरस थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 371 दादरी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
गंगीरी का फ़ैसला सिर्फ़ 0.3% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 268 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | तिलक सिंह | 32,38139.9% | |
| 2 | बाबू सिंह Lok Dal | Lok Dal | 32,11339.6% |
| 3 | अनिसुर रेहमान शेरवानी जनता | जनता | 5,2246.4% |
| 4 | जलालुद्दीन निर्दलीय | निर्दलीय | 4,4545.5% |
| 5 | ढाल सिंह पिपिल निर्दलीय | निर्दलीय | 2,6733.3% |
| 6 | भूप सिंह ICJ | ICJ | 1,8612.3% |
| 7 | शमशूल इस्लाम निर्दलीय | निर्दलीय | 1,6542.0% |
| 8 | रोशन सिंह | 3660.5% | |
| 9 | गंगाराम उर्फ़ गंगा प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 3460.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 86% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.07 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
गंगीरी से कौन जीता, 1974–1996
INC ने यह सीट JNP(SC) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह INC की पहली जीत थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1980 के 50.8% से बढ़कर 53.6% हो गया। इसके बाद 1989 के चुनाव में यह सीट JD ने जीती।
- 1974बाबू सिंह (BKD), जीत का अंतर 2.6%
- 1977बाबू सिंह (JNP), जीत का अंतर 23.8%
- 1980बाबू सिंह (JNP(SC)), जीत का अंतर 4.0%
- 1985तिलक सिंह (INC), जीत का अंतर 0.3%
- 1989बाबू सिंह (JD), जीत का अंतर 13.4%
- 1991राम सिंह (BJP), जीत का अंतर 6.5%
- 1993वीरेश्वर सिंह उर्फ़ वीरेश यादव (SP), जीत का अंतर 4.0%
- 1996राम सिंह (BJP), जीत का अंतर 0.5%