कसयाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
सूर्य प्रताप शाही (BJP) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 24.0% वोट पाकर कसया सीट जीती और ब्रह्म शंकर त्रिपाठी (निर्दलीय) को 559 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 200 रामकोला थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 200 मेहनगर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
कसया का फ़ैसला सिर्फ़ 0.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 559 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
16 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सूर्य प्रताप शाही | 18,02024.0% | |
| 2 | ब्रह्म शंकर त्रिपाठी निर्दलीय | निर्दलीय | 17,46123.2% |
| 3 | सुरेन्द्र नाथ | 17,12322.8% | |
| 4 | राम नरेश पाण्डेय जनता | जनता | 5,4947.3% |
| 5 | शिव औतार मणि त्रिपाठी Lok Dal | Lok Dal | 4,4966.0% |
| 6 | हरिद्वार राय निर्दलीय | निर्दलीय | 3,5014.7% |
| 7 | बद्रीश्वर निर्दलीय | निर्दलीय | 3,2754.4% |
| 8 | जहांगीर निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1711.6% |
| 9 | ओबेदु रहमान निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1291.5% |
| 10 | छेदी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0461.4% |
| 11 | दीपक यादव निर्दलीय | निर्दलीय | 9461.3% |
| 12 | मान मोहन किशोर शाही निर्दलीय | निर्दलीय | 4170.6% |
| 13 | राम अधार | 3830.5% | |
| 14 | महेन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 3050.4% |
| 15 | राम किंकर सिंह उर्फ़ राम किंकर निर्दलीय | निर्दलीय | 1900.3% |
| 16 | रामवती निर्दलीय | निर्दलीय | 1890.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 70% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.64 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कसया से कौन जीता, 1974–1996
BJP ने यह सीट INC(U) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह BJP की पहली जीत थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1980 के 50.6% से घटकर 47.9% रह गया। इसके बाद 1989 के चुनाव में यह सीट JD ने जीती।
- 1974राज मंगल पाण्डेय (INC), जीत का अंतर 2.7%
- 1977राजमंगल पाण्डेय (JNP), जीत का अंतर 50.8%
- 1980राज मंगल पाण्डेय (INC(U)), जीत का अंतर 39.5%
- 1985सूर्य प्रताप शाही (BJP), जीत का अंतर 0.7%
- 1989ब्रह्म शंकर (JD), जीत का अंतर 10.9%
- 1991सूर्य प्रताप शाही (BJP), जीत का अंतर 6.7%
- 1993ब्रह्म शंकर त्रिपाठी (JD), जीत का अंतर 10.4%
- 1996सूर्य प्रताप शाही (BJP), जीत का अंतर 5.4%