काशीपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
नारायण दत्त (INC) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 70.2% वोट पाकर काशीपुर सीट जीती और अनवर अहेमद (LKD) को 48,808 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 16 हल्द्वानी थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 16 मुरादाबाद पश्चिम है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — नारायण दत्त 58.0% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | नारायण दत्त | 59,08370.2% | |
| 2 | अनवर अहेमद Lok Dal | Lok Dal | 10,27512.2% |
| 3 | कृष्ण कुमार | 8,56310.2% | |
| 4 | गुरुचरण सिंह वाम दल | वाम दल | 3,1043.7% |
| 5 | प्रद्युम्न कुमार ICJ | ICJ | 9621.1% |
| 6 | बलबीर सिंह जनता | जनता | 8321.0% |
| 7 | अजय निर्दलीय | निर्दलीय | 4640.6% |
| 8 | कल्लन निर्दलीय | निर्दलीय | 3330.4% |
| 9 | महेन्द्र सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3170.4% |
| 10 | हरदेव सिंह | 2710.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC और LKD को 82% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 1.93 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
काशीपुर से कौन जीता, 1974–1996
INC ने यह सीट INC(I) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1977 में जीत दर्ज की थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1980 के 50.5% से बढ़कर 53.9% हो गया। इसके बाद 1989 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।
- 1974नारायण दत्त तिवारी (INC), जीत का अंतर 39.4%
- 1977नारायण दत्त (INC), जीत का अंतर 11.4%
- 1980सतेन्द्र चन्द्र गुरिया (INC(I)), जीत का अंतर 1.9%
- 1985नारायण दत्त (INC), जीत का अंतर 58.0%
- 1989करण चन्द्र सिंह (IND), जीत का अंतर 22.6%
- 1991राजीव कुमार (BJP), जीत का अंतर 1.3%
- 1993राजीव कुमार (BJP), जीत का अंतर 2.0%
- 1996के.सी. सिंह बाबा (AIIC(T)), जीत का अंतर 1.6%