मिल्कीपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
मित्र सेन (CPI) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 48.5% वोट पाकर मिल्कीपुर सीट जीती और हनुमान प्रसाद त्रिपाठी (INC) को 6,060 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 136 अयोध्या थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 136 बहराइच है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
7.3% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मित्र सेन वाम दल | वाम दल | 40,23148.5% |
| 2 | हनुमान प्रसाद त्रिपाठी | 34,17141.2% | |
| 3 | मथुरा प्रसाद तिवारी उर्फ़ बद्री तिवारी | 3,2363.9% | |
| 4 | भागल प्रसाद उर्फ़ बी. पी. सागर निर्दलीय | निर्दलीय | 3,0193.6% |
| 5 | देव सरन यादव जनता | जनता | 6260.8% |
| 6 | भारतेंदु तिवारी | 5940.7% | |
| 7 | नागेन्द्र प्रताप सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 5390.7% |
| 8 | नरेन्द्र कुमार ICS | ICS | 4950.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
CPI, INC और BJP को 94% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.45 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मिल्कीपुर से कौन जीता, 1974–1996
CPI ने यहाँ लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1977 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 47.8% से बढ़कर 48.5% हो गया। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1980 के 44.3% से बढ़कर 51.8% हो गया। इसके बाद 1989 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।
- 1974धर्म चन्द्र (INC), जीत का अंतर 26.2%
- 1977मित्र सेन (CPI), जीत का अंतर 26.7%
- 1980मित्र सेन (CPI), जीत का अंतर 9.5%
- 1985मित्र सेन (CPI), जीत का अंतर 7.3%
- 1989बृज भूषण मणि त्रिपाठी (INC), जीत का अंतर 5.9%
- 1991मथुरा प्रसाद तिवारी उर्फ़ माद्री प्रसाद (BJP), जीत का अंतर 0.5%
- 1993मित्रसेन यादव (CPI), जीत का अंतर 0.7%
- 1996मित्र सेन यादव (SP), जीत का अंतर 4.5%