दूसरा कार्यकाल, ज़्यादा कड़ा मुक़ाबला
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस फिर सत्ता में बनी रही, हालाँकि विपक्ष पर उसकी बढ़त पहले से कम थी।
कांग्रेस ने राज्य की 320 सीटों में से 172 सीटें जीतीं।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 11 ज़्यादा था।
भारतीय जनता पार्टी 119 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
भाजपा के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) विजेता से थोड़ा ही पीछे था: 40.6% के मुक़ाबले 39.3%।
क्या बदला
कुल परिणाम भले मिलता-जुलता रहा, पर अलग-अलग सीटों पर काफ़ी उलटफेर हुआ।
राज्य की 320 सीटों में से 159 सीटें किसी दूसरी पार्टी के पास चली गईं।
सबसे बड़ा बदलाव भाजपा से कांग्रेस की ओर रहा, 60 सीटें इसी तरह बदलीं।
कांग्रेस अब राज्य में लगातार 2 चुनाव जीत चुकी थी।
अहम आँकड़े
मतगणना के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 15 वोट रहा।
रात का सबसे बड़ा जीत का अंतर उलटी दिशा में रहा: राधोगढ़, मध्य प्रदेश में विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 66.5% वोट आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) सरिया, मध्य प्रदेश में रहा, जहाँ लगभग 79.8% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
सबसे कम मतदान प्रतिशत चित्रकोट, मध्य प्रदेश में रहा, सिर्फ़ 29.6%।
पृष्ठभूमि
यह मुक़ाबला राज्य की दो मुख्य पार्टियों के बीच की पुरानी प्रतिद्वंद्विता की अगली कड़ी था।