गोविंदपुराविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1998
बाबूलाल गौर (BJP) ने 1998 के विधान सभा चुनाव में 52.7% वोट पाकर गोविंदपुरा सीट जीती और करनैल सिंह (INC) को 10,883 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 238 शुजालपुर थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से कोई सीट नंबर 238 नहीं है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
8.0% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बाबूलाल गौर NDA | NDA | 71,58952.7% |
| 2 | करनैल सिंह | 60,70644.7% | |
| 3 | एस. आर. गलफाटे | 1,7861.3% | |
| 4 | आनंदराम देवांगन | 5400.4% | |
| 5 | नरेश कुमार जैन निर्दलीय | निर्दलीय | 3590.3% |
| 6 | पवन कपूर (पप्पू भैया) | 3300.2% | |
| 7 | भैयालाल निर्दलीय | निर्दलीय | 3060.2% |
| 8 | संतोष कुमार मालवीय SDP(MP) | SDP(MP) | 2110.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP और INC को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.09 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
गोविंदपुरा से कौन जीता, 1977–1998
BJP ने यहाँ लगातार पाँचवीं बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1980 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 69.8% से घटकर 52.7% रह गया। यह 1980 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1993 के 64.8% से घटकर 51.6% रह गया।