गोविंदपुराविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
बाबूलाल गौड़ (BJP) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 53.4% वोट पाकर गोविंदपुरा सीट जीती और आर. डी. त्रिपाठी (INC) को 6,921 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 238 शुजालपुर थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से कोई सीट नंबर 238 नहीं है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
11.4% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बाबूलाल गौड़ | 32,40753.4% | |
| 2 | आर. डी. त्रिपाठी | 25,48642.0% | |
| 3 | रमेश नारायण गिरी निर्दलीय | निर्दलीय | 6981.1% |
| 4 | बसंत उमडे निर्दलीय | निर्दलीय | 6651.1% |
| 5 | दीनानाथ रामानंद निर्दलीय | निर्दलीय | 4150.7% |
| 6 | राम दयाल लोहिया निर्दलीय | निर्दलीय | 4130.7% |
| 7 | अचल सिंह Lok Dal | Lok Dal | 2210.4% |
| 8 | पारसनाथ गजभिया निर्दलीय | निर्दलीय | 1610.3% |
| 9 | वी. पी. सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1420.2% |
| 10 | बुलचंद शामनदास निर्दलीय | निर्दलीय | 1050.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP और INC को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.17 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
गोविंदपुरा से कौन जीता, 1977–1998
BJP ने 1980 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 45.1% से बढ़कर 53.4% हो गया। मतदान प्रतिशत 1980 के 46.9% से बढ़कर 55.1% हो गया। इसके बाद 1990 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।