सीपतविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1998
इंजीनियर रामेश्वर खरे (BSP) ने 1998 के विधान सभा चुनाव में 26.0% वोट पाकर सीपत सीट जीती और प्रसाद रामनारायण शास्त्री (BJP) को 2,816 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 119 पिथौरा थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 119 लखनादौन है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। इंजीनियर रामेश्वर खरे 3.7% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | इंजीनियर रामेश्वर खरे | 19,53326.0% | |
| 2 | प्रसाद रामनारायण शास्त्री NDA | NDA | 16,71722.2% |
| 3 | चन्द्र प्रकाश बाजपेयी | 16,28421.6% | |
| 4 | अरुण तिवारी निर्दलीय | निर्दलीय | 6,3578.4% |
| 5 | नन्द किशोर | 6,3048.4% | |
| 6 | प्रहलाद कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 6,1338.2% |
| 7 | छेदीलाल धीमर निर्दलीय | निर्दलीय | 3,0194.0% |
| 8 | सूर्य प्रकाश निर्दलीय | निर्दलीय | 4840.6% |
| 9 | मणि किशोर निर्दलीय | निर्दलीय | 2230.3% |
| 10 | नवल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1720.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 70% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.37 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सीपत से कौन जीता, 1977–1998
BSP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1993 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह BSP की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1993 के 66.5% से घटकर 63.9% रह गया।