सीपतविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
अरुण तिवारी (INC) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 42.1% वोट पाकर सीपत सीट जीती और प्रेम सिंह (BJP) को 4,125 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 119 पिथौरा थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 119 लखनादौन है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
8.9% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
12 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अरुण तिवारी | 19,43642.1% | |
| 2 | प्रेम सिंह | 15,31133.2% | |
| 3 | राधेश्याम शुक्ला निर्दलीय | निर्दलीय | 7,26715.8% |
| 4 | लखन सुबोध वाम दल | वाम दल | 8931.9% |
| 5 | तीरथराम निर्दलीय | निर्दलीय | 8421.8% |
| 6 | नारायण प्रसाद डोंगरे निर्दलीय | निर्दलीय | 8401.8% |
| 7 | बाबूलाल वाम दल | वाम दल | 6181.3% |
| 8 | बी. पी. दुबे निर्दलीय | निर्दलीय | 3360.7% |
| 9 | अरुण कुमार तिवारी निर्दलीय | निर्दलीय | 1900.4% |
| 10 | छबिनाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 1470.3% |
| 11 | सुन्दरलाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1290.3% |
| 12 | नेपाल रामायण निर्दलीय | निर्दलीय | 1160.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.19 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सीपत से कौन जीता, 1977–1998
INC ने यह सीट INC(I) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1977 में जीत दर्ज की थी। मतदान प्रतिशत 1980 के 53.3% से बढ़कर 60.0% हो गया। इसके बाद 1990 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।