सीपतविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1977
राधेश्याम शुक्ला (INC) ने 1977 के विधान सभा चुनाव में 54.8% वोट पाकर सीपत सीट जीती और बद्रीधर दीवान (JNP) को 7,221 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 119 पिथौरा थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 119 लखनादौन है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — राधेश्याम शुक्ला 20.4% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | राधेश्याम शुक्ला | 19,41854.8% | |
| 2 | बद्रीधर दीवान जनता | जनता | 12,19734.4% |
| 3 | देवी प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 9482.7% |
| 4 | पंडित रमाकांत मिश्रा निर्दलीय | निर्दलीय | 9362.6% |
| 5 | बनमाली निर्दलीय | निर्दलीय | 8702.5% |
| 6 | मोहम्मद सईद निर्दलीय | निर्दलीय | 8192.3% |
| 7 | सुंदरलाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1150.3% |
| 8 | अभयलाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1140.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, JNP और एक निर्दलीय को 92% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.37 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सीपत से कौन जीता, 1977–1998
इसके बाद 1980 के चुनाव में यह सीट INC(I) ने जीती।