जबलपुर पूर्वविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1998
अंचल सोनकर (BJP) ने 1998 के विधान सभा चुनाव में 36.4% वोट पाकर जबलपुर पूर्व सीट जीती और रमेश (INC) को 1,580 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 195 लखनादौन थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 195 नेपानगर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। अंचल सोनकर 2.4% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अंचल सोनकर NDA | NDA | 24,36636.4% |
| 2 | रमेश | 22,78634.0% | |
| 3 | सोनी मास्टर | 14,39221.5% | |
| 4 | सी.एल. बांसकर | 4,6036.9% | |
| 5 | एड. राजाराम चौधरी उर्फ राजजबलपुरी | 2460.4% | |
| 6 | कैलाश सोनकर एडवोकेट निर्दलीय | निर्दलीय | 1300.2% |
| 7 | अरविन्द पैगवार | 1270.2% | |
| 8 | कामता बांसकर निर्दलीय | निर्दलीय | 1070.2% |
| 9 | राकेश कुमार सोनकर निर्दलीय | निर्दलीय | 850.1% |
| 10 | जयराज (राजभाई) RDNBP | RDNBP | 470.1% |
| 11 | शारदा प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 340.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 92% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.34 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
जबलपुर पूर्व से कौन जीता, 1977–1998
BJP ने 1993 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 45.5% से घटकर 36.4% रह गया। यह 1977 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1993 के 55.7% से घटकर 54.0% रह गया।