कांग्रेस की नए नाम से वापसी
क्या हुआ
कुछ ही साल पहले ज़ोरदार जीत से सत्ता में आई पार्टी ख़ुद हार गई, और उसकी जगह नए सिरे से संगठित कांग्रेस आई।
इस बार इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) ने राज्य विधान सभा की कमान संभाली।
इसने विधान सभा की 320 में से 246 सीटें जीतीं, यानी एक और एकतरफ़ा जीत।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी ने 60 सीटें जीतीं।
क्या बदला
वह पार्टी उतनी ही तेज़ी से ढह गई, और नए सिरे से संगठित कांग्रेस ने उसकी जगह ली।
झुकाव के आँकड़े दिखाते हैं कि विधान सभा की 162 सीटें अकेले जनता पार्टी के हाथ से निकलीं।
इस चुनाव में सबसे आगे रहे दलों में से दो, भाजपा, दोनों ने राज्य में पहली बार सीटें जीतीं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला सीहोर, मध्य प्रदेश में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 176 रहा।
दूसरी ओर, चंद्रपुर, मध्य प्रदेश में विजेता का जीत का अंतर 74.5% वोट रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) मनावर, मध्य प्रदेश में रहा, 72.7%।
किसी भी एक सीट पर सबसे ज़्यादा मतदाता भोपाल दक्षिण, मध्य प्रदेश में थे, 1,32,192 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) का नाम राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की राजनीति में हुई टूट की ओर इशारा करता था।
इसने यह चुनाव इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) के रूप में लड़ा, जो कांग्रेस से निकली कई पार्टियों में से एक थी।