विजयराघवगढ़विधान सभा चुनाव का परिणाम, 1980
आर. के. शर्मा (INC(I)) ने 1980 के विधान सभा चुनाव में 37.9% वोट पाकर विजयराघवगढ़ सीट जीती और लाल राजेन्द्र सिंह (BJP) को 5,565 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 204 चौरई थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 204 सेंधवा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
14.4% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | आर. के. शर्मा | 14,67037.9% | |
| 2 | लाल राजेन्द्र सिंह | 9,10523.6% | |
| 3 | लक्ष्मीचंद बझल JNP(JP) | JNP(JP) | 6,52916.9% |
| 4 | रामकली बाई निर्दलीय | निर्दलीय | 1,7764.6% |
| 5 | लाल त्रिभुवन प्रताप सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,6934.4% |
| 6 | बंशी लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3513.5% |
| 7 | नरेन्द्र प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 9662.5% |
| 8 | हरि शंकर उमरालिया JNP(SC) | JNP(SC) | 9352.4% |
| 9 | राम अवतार निर्दलीय | निर्दलीय | 9052.3% |
| 10 | हरि प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 3991.0% |
| 11 | रामाधार सानी | 3390.9% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 78% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.25 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
विजयराघवगढ़ से कौन जीता, 1977–1998
INC(I) ने यह सीट JNP से छीन ली, जिसने इसे 1977 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1977 के 55.2% से घटकर 50.8% रह गया। इसके बाद 1985 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।