कवर्धाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1980
हमीदुल्लाह खान (निर्दलीय) ने 1980 के विधान सभा चुनाव में 32.8% वोट पाकर कवर्धा सीट जीती और रानी शशि प्रभा देवी (RRP) को 1,485 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 176 बहोरीबंद थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 176 उज्जैन उत्तर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। हमीदुल्लाह खान 3.1% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | हमीदुल्लाह खान निर्दलीय | निर्दलीय | 15,73132.8% |
| 2 | रानी शशि प्रभा देवी RRP | RRP | 14,24629.7% |
| 3 | यशवंत राज सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 7,80216.3% |
| 4 | सुशील कुमार चौरसिया | 6,66213.9% | |
| 5 | सिया राम साहू JNP(JP) | JNP(JP) | 3,5697.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 79% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.05 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कवर्धा से कौन जीता, 1977–1998
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट RRP से छीन ली, जिसने इसे 1977 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1977 के 66.7% से घटकर 62.9% रह गया। इसके बाद 1985 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।