पन्नाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1980
हेत राम दुबे (INC(I)) ने 1980 के विधान सभा चुनाव में 49.8% वोट पाकर पन्ना सीट जीती और बद्री प्रसाद गुप्ता (BJP) को 7,387 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 56 मऊगंज थी। 2003 में, छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, जब सीटों के नंबर बदले गए, तब भी इसका नंबर वही रहा। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 56 जबेरा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — हेत राम दुबे 16.5% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | हेत राम दुबे | 22,34649.8% | |
| 2 | बद्री प्रसाद गुप्ता | 14,95933.3% | |
| 3 | महेश निर्दलीय | निर्दलीय | 2,8216.3% |
| 4 | रामभक्त JNP(SC) | JNP(SC) | 2,6005.8% |
| 5 | कासिम खान JNP(JP) | JNP(JP) | 6301.4% |
| 6 | देवीदयाल निर्दलीय | निर्दलीय | 5451.2% |
| 7 | राम सजीवन निर्दलीय | निर्दलीय | 5261.2% |
| 8 | प्रभावती निर्दलीय | निर्दलीय | 4541.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC(I), BJP और एक निर्दलीय को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.73 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पन्ना से कौन जीता, 1977–2003
INC(I) ने यह सीट JNP से छीन ली, जिसने इसे 1977 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1977 के 60.1% से घटकर 50.3% रह गया। इसके बाद 1985 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।